दुर्गे दुर्घट भारी
Durge Durgat Bhari
आरती संग्रह
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Jai Adhya Shakti
Durga aarti in Gujarati. Sung during Navratri.
Also known as: Jay Adhya Shakti, Om Jayo Jayo Maa Jagadambe, Gujarati Navratri Aarti, Ambaji Aarti
Source: Kavi Shivanand
Traditional / public-domain text published for cultural preservation.
Content status: verified (last reviewed 2026-10-03)
Jai Adhya Shakti
जय आद्या शक्ति, माँ जय आद्या शक्ति।
अखंड ब्रह्माण्ड दीपाव्यां, पडवे प्रगटतया माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
द्वितीय बे स्वरूप, शिव शक्ति जाणुं, माँ शिव शक्ति जाणुं।
ब्रह्मा गणपति गाये, हर गाये हर माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
तृतीया त्रण स्वरूप त्रिभुवनमां बेठा, माँ त्रिभुवनमां बेठा।
त्रय थकी तरवेणी, तमे तरवेणी माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
चोथे चतुरा महालक्ष्मी माँ सचराचर व्याप्या।
चार भुजा चौ दिशा प्रगट्या दक्षिणमां।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
पंचमी पंच ऋषि, पंचमी गुण पद्मा, माँ गुण पद्मा।
पंच तत्त्व त्यां सोहिये, पंचे तत्त्वो माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
षष्ठी तुं नारायणी महिषासुर मार्यो, माँ महिषासुर मार्यो।
नरनारीने रूपे व्याप्या सर्वेमां।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
सप्तमी सप्त पाताल संध्या सावित्री, माँ संध्या सावित्री।
गौ गंगा गायत्री गौरी गीता माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
अष्टमी अष्ट भुजा आई आनंदा, माँ आई आनंदा।
सुरनर मुनिवर जन्म्या देवो दैत्यो माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
नवमी नवगुण नाग सेवे नवदुर्गा, माँ सेवे नवदुर्गा।
नवरात्रीनां पूजन शिवरात्रीनां अर्चन कीधा हर ब्रह्मा।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
दशमी दस अवतार जय विजयादशमी, माँ जय विजयादशमी।
रामे रावण मार्या, रावण रोड्यो माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
एकादशी अगियारस कात्यायनी कामा, माँ कात्यायनी कामा।
काम दुर्गा कालिका श्यामा ने रामा।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
बारशे बाला रूप बहुचरी अम्बा माँ, माँ बहुचरी अम्बा माँ।
बटुक भैरव सोहिये, काल भैरव सोहिये, तारा छे तुजमां।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
तेरशे तुलजा रूप तू तारुणि माँ, माँ तू तारुणि माँ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव गुण तारा गाता।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
चौदशे चौदा रूप चंडी चामुंडा, माँ चंडी चामुंडा।
भावभक्ति कांई आपो, चतुराई कांई आपो, सिंहवाहिनी माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
पूनमे कुम्भ भयो सांभलजो करुणा, माँ सांभलजो करुणा।
वसिष्ठ देवे वखाण्या, मार्तण्ड मुनिये वखाण्या गाये शुभकविता।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
संवत सोल सतावन सोलशे बावीस माँ, माँ सोलशे बावीस माँ।
संवत सोले प्रगट्यां रेवा ने तीरे, माँ गंगा ने तीरे।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
अंबावटी नगरी आईं रुपावटी नगरी, माँ रुपावटी नगरी।
सोल सहस्त्र त्यां सोहिये क्षमा करो गौरी, माँ दया करो गौरी।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
शिवशक्तिनी आरती जे कोई गाशे, माँ जे कोई गाशे।
भणे शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पाशे, हर कैलाशे जाशे, माँ अम्बा दुख हरशे।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
ए बे एक स्वरूप, अंतर नवधरशो, माँ अंतर नवधरशो।
भोला भवानी ने भजता, भवसागर तरशो।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
भाव ना जाणू, भक्ति ना जाणू, नव जाणू सेवा, माँ नव जाणू सेवा।
वल्लभ भट्ट ने राखो, आ बालक ने राखो, चरणे सुख देवा।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
जय आद्या शक्ति, माँ जय आद्या शक्ति।
अखंड ब्रह्माण्ड दीपाव्यां पडवे प्रगटतया माँ।
ॐ जयो जयो माँ जगदम्बे॥
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